यह कहानी आप ने बचपन में सुनी ही होगी, कि खरगोश के सिर पर पेड़ से फल गिरा और वह चिल्लाते हुए भागा 'अरे, आसमान गिरा', लेकिन अगर हम कहें कि अब वह दिन दूर नहीं जब आसमान सचमुच गिरने ही वाला है, तो आपको लोगो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
वैज्ञानिकों का दावा है कि पिछले दस सालों (मार्च 2000 से फरवरी 2010 तक) से बादलों की धरती से ऊंचाई लगातार घटती जा रही है जिससे बादल लगातार नीचे होते जा रहे हैं। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड विश्वविद्यालय में किए गए अध्ययन में इस तथ्य का पता लगाया गया।
इस बारे में शोधकर्ता रॉजर डेवीस का मानना है कि बादल नीचे की तरफ छा रहे हैं मगर इसके पीछे के कारणों का अभी तक हम पूरी तरह से पता नहीं लगा सके हैं। इसके पीछे पर्यावरण में परिवर्तन, ग्रीनहाउस एफेक्ट व ग्लोबल वार्मिंग जैसे कारण हो सकते हैं। बादलों के धरती से करीब होने की वजह से ठंड में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि की आशंका भी है।
रॉजर ने लाइवसाइंस को बताया कि हमने यह जानकारी नासा टेरा स्पेसक्राफ्ट द्वारा बादलों के बहुआयामी चित्रों से निकाली है। चूंकि बादल किसी विशेष स्थान पर स्थिर नहीं रहते इसलिए इनके पृथ्वी के समीप आने के कारणों का पता ठीक-ठीक नहीं लगाया जा सकता है
वैज्ञानिकों का दावा है कि पिछले दस सालों (मार्च 2000 से फरवरी 2010 तक) से बादलों की धरती से ऊंचाई लगातार घटती जा रही है जिससे बादल लगातार नीचे होते जा रहे हैं। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड विश्वविद्यालय में किए गए अध्ययन में इस तथ्य का पता लगाया गया।
इस बारे में शोधकर्ता रॉजर डेवीस का मानना है कि बादल नीचे की तरफ छा रहे हैं मगर इसके पीछे के कारणों का अभी तक हम पूरी तरह से पता नहीं लगा सके हैं। इसके पीछे पर्यावरण में परिवर्तन, ग्रीनहाउस एफेक्ट व ग्लोबल वार्मिंग जैसे कारण हो सकते हैं। बादलों के धरती से करीब होने की वजह से ठंड में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि की आशंका भी है।
रॉजर ने लाइवसाइंस को बताया कि हमने यह जानकारी नासा टेरा स्पेसक्राफ्ट द्वारा बादलों के बहुआयामी चित्रों से निकाली है। चूंकि बादल किसी विशेष स्थान पर स्थिर नहीं रहते इसलिए इनके पृथ्वी के समीप आने के कारणों का पता ठीक-ठीक नहीं लगाया जा सकता है




